Wednesday, 14 October 2015

Dosti Shayari Page-4

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Dosti Shayari-1

ये दुआ है हमारी बीते सुख से जिंदगी तुम्हारी
दोस्त मूज़े प्यारी हैं तेरी यारी
जिसके लिए वॉर सकता हूँ दुनिया सारी.

Dosti Shayari-2

रिश्तो की किताब का कवर है आपकी दोस्ती
आपकी दोस्ती से बनी है हुमारी हस्ती
खून के रिश्तो की बात आप करते है
हुमारे लिए तो ज़िंदगी है आपकी दोस्ती.

Dosti Shayari-3

आसमान हमसे नाराज़ हैं
तारों का गुस्सा बेहिसाब हैं
वो सूब हुंसे जलते हैं क्यूँ की
चाँद से बेहतर दोस्त हमारे पास हैं.

Dosti Shayari-4

ज़िंदगी को एक रंगीन कलपना समझो
सुबह को सच रात को सपना समझो
भूलना चाहते हो सभी घुमओ को तो
ज़िंदगी मे दोस्तो को अपना समझो

Dosti Shayari-5

तुम हमेशा खुश रहो, ऐसी विश हैं हमारी
ओर आगे बढ़ते रहो, ऐसी दुआ है हमारी
तुम जहा भी हो जैसी भी हो
एक दिन हमे ढूँढ पाओ, ऐसी ख्वाइश है.

Dosti Shayari-6

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-लुत्फ़ कभी ना करना
तुम्हें क़सम है हमारे सर के हमारे हक़ में कमी ना करना
कहाँ का आना कहाँ का जाना वो जानते ही नही ये रस्में
वहाँ है वादे के भी ये सूरत कभी तो करना कभी ना करना
हमारी मय्यत पे तुम जो आना तो चार आँसू बहा के जाना
ज़रा रहे पास-ए-आबरू भी कहीं हमारी हँसी ना करना
वो इक हमारा तारिक़-ए-उलफत की दुश्मनों से भी मिल के चलना
ये एक शेवा तेरा सीतमगार की दोस्त से दोस्ती ना करना

Dosti Shayari-7

सभी दोस्तो को “HAPPY NEW YEAR ” आप सेब की मैल बरबेर मिलती रहती है कभी -कभी जवाब लाते हो जाता है उस के ले शमा चटा हू .आप सब का प्यार मुघे यहा तक ले आया .उमिद करता हू आगे भी एसी तरह आप सेब का प्यार मिलता रहे गा
एक बार फिर आप सबी को “H A P P Y N E W Y E A R
Old Year सब से हो रहा है दूर*
क्या करें यही है कुद्रट का दस्तूर*
पुरानी यादें सोच कर उदास ना हो तुम*
नया साल आया है चलो..
धूम मचले, धूम मचले धूम!!
सुनेहरी धूप बरसात क बाद
थोरी सी हँसी हेर बात क बाद
उसी तरग हो मुबारक आप को 2016, 2015 के बाद
Wish You HaPPy New Year..
कभी हसती है तो कभी रूलाती है
ये ज़िंदगी भी ना जाने कितने रंग देखती है
हेस्ट है तो भी आँखों में नामी आ जाती है
ना जाने ये कैसी यादें है जो दिल में बस जाती है
दुआ करते है इस नये साल क अवसर पेर
मेरे दोस्तों क लबों पेर सदा मुस्कान रहे
क्योकि उनकी हेर मुस्कुराहट हमें खुशी दे जाती है.

Dosti Shayari-8

जो मुश्किल आसान बनाते हैं
जो दुश्मन को गिरते हैं
जो हुंस्ते और हँसते हैं
उन को भला किया कहते हैं?
उन ही को दोस्त कहते हैं
जो जीत की खुशी मानते हैं
जो हार मैं साथ बिताते हैं
जो फिर भी कहाँ जताते हैं
उन को भला किया कहते हैं?
उन्ही को दोस्त कहते हैं
जो होते हैं ख़ज़ाने हुमारे लिये
जो होते हैं सहारे हुमारे लिये
जो प्यार देते हैं प्यार लेने के लिये
उन को भला किया कहते हैं?
इन्ही को दोस्त कहते हैं
जिन की क़ीमत पता चलती है भिचरने के बाद
नही खरीदा जा सकता उन को पैसे से यार
यह हैं हुमारे लिये खुदा का प्यार
इन को भला किया कहते हैं?
इन्ही को दोस्त कहते हैं.

Dosti Shayari-9

फिर क्यू दोस्त हमसे तुम ही जुड़ा हो
तुम रात हो तुम ही दिन हो
तुम आज हो तुम ही कल हो
तुम चाँद हो तुम ही सूरज हो
तुम अंबार हो तुम ही धरती हो
तुम बादल हो तुम ही बारिस हो
तुम नदी हो तुम ही सागर हो
तुम गुल हो तुम ही गुलशन हो
तुम बाग हो तुम ही बहार हो
तुम फूल हो तुम ही कली हो
तुम दिल हो तुम ही धड़कन हो
तुम मॅन हो तुम ही मनमीत हो
तुम नैन हो तुम ही सपना हो
तुम सांस हो तुम ही जिंदगी हो
तुम चाहत हो तुम ही अरमान हो
तुम आस हो तुम ही प्यास हो
फिर क्यू दोस्त हुंसे तुम ही जुड़ा हो.

Dosti Shayari-10

जब जिंदगी मेरी कुछ रुकने लगी थी,
बढ़ते कदम कुछ थकने लगे थे,
सहारा यू दोस्त का मिला मुझको
के दोस्ती पे अपनी गुमान आने लगा मुझको.
कुछ चेहरे जब पराए होने लगे थे,
कुछ हाथ छोड़ के जाने लगे थे,
तेरे हाथ ने कुछ यू थमा मुझको
के दोस्ती पे अपनी गुमान आने लगा मुझको.
सफ़र मैं जब पाया अकेला मैने खुदको था,
शितिज पे तारा कोई ना था राहगीर मेरा,
कुछ यू हुंसफर बन गये तुम मेरे,
के दोस्ती पे अपनी गुमान आने लगा मुझको.
अब ना क़िस्सी साथी की ख्वाहिश होगी
के दोस्त तेरे जैसा जो मिल गया है मुझको,
कुछ यू खिली है मुश्किलो मैं दोस्ती अपनी
के दोस्ती पे अपनी गुमान आने लगा मुझको.
अब ना आनजम की फ़िक्र है मुझको,
नही राह की मुश्किलो का कोई डर है,
बाते कुछ पल साथ हम राह मैं इसतरह
के दुनिया करे गुमान दोस्ती पे अंपनी.

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Dosti Shayari Page-3

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Dosti Shayari-1

ए दोस्त तेरी याद में दिल का उसूल है
हम तुझ को भूल जाएगे यह तेरी भूल है
मेरी आँखों से कोई आँसू ना निकला लेकिन
घर के हर दर से रोने की सदा आती है
शिकवे भी ज़ियादा है और शिकायत भी बहोत है
और इश्स के लिए दिल में मोहब्बत भी बहोत है
तुम “अंजान” से बिछड़ जाओ तो यूँ मायूस ना होना
क्यूंकी रिश्तो के निभाने में मुसीबत भी बहोत है.

Dosti Shayari-2

माना के उन के नेज़ों पे अब सर नही कोई
क्या उन के आस्तीन में भी खंजर नही कोई
मजबूरियों ने घर से निकालने ना दिया
दुनिया समझ रही है मेरा घर नही कोई
अब क्या करेंगे हम नये सूरजकी रोशनी
जब देखने के वास्ते मंज़र नही कोई
दिल हो रहा है देर से खामोश झील सा
क्या दोस्तों के हाथ में पथर नही कोई
क़िस्मत सभी के वक़्त के हाथों में रहती है
इस दौर में किसी का मुक़द्दर नही कोई

Dosti Shayari-3

अगेर हम दोस्त होते
तू करम की इंतहा केरते
तुम्हे पलकून पे रखते हम
तुम्हे दिल मैं बासाते हम
अगेर तुम रूठ जाते तू
तुम्हे कितना मानते हम
जो मिलने तुम नही आते तू
आ कर खुद तुम्हे मिलते
तुम्हारी लघज़िशून को भी
हँसी मैं हम यूरा देते
अगेर अपनी ख़ाता होती
तू खुद को भी सज़ा देते
मगेर यह सब जब ही होता
अगेर हम दोस्त होते तू
मगेर इतना ही जाना है
क तुम ने आज तक हम को
पराया कह कर जाना है
कभी हमदम ना माना है
अगेर हम दोस्त होते तू .

Dosti Shayari-4

दोस्ती तेरी हम को प्यारी हे
सारी दुनिया से ये निराली हे
तू अगर मॅंगल ये जान मुझ से
हँसके दे दें गे ये तुम्हारी हे
तू मेरा दोस्त कितना प्यारा हे
तेरे बिन अब न्ही गुज़रा हे
पास हो दूर चाहे होता हे
तेरा हर पल मुझे शरा हे
ज़िंदगी जबभी गम मे दुबई हे
इसको तूने दिया शरा हे
तेरी बातों से आएसा लग ता हे
तेरा खुशियों से कुछ किनारा हे
गम मे डूबा हे तेरा हर पल क़्नु
जब तुझे मिला मेरा शरा हे
तुझ से हम ने काइया ये वाडा हे
आखरी सांस तक निभाएँगे
बस खुदा से दुवा ये माँगी हे
तेरी खुश को सिर्फ़ माँगा हे
तुझ को मिल जाई तेरी शुषा सब
रब से हर पल यही माँगा हे.
आप को किसी भी तार हाँ की शायरी चाहिए बताना
मे उसी तार हाँ की लिख ने की कोशिश करूँगी.

Dosti Shayari-5

मंज़िल-ए-जनन को जब ये दिल रवाँ था दोस्तो
तुम को मैं कैसे बताऊ क्या समान था दोस्तो
हर गुमान पहने हुए था एक मलबुस-ए-यक़ीन
हर यक़ीन जान दादा-ए-हुस्न-ए-गुमान था दोस्तो
दिल की हर धड़कन मकान-ओ-लामकान पर थी मुहित
हर नफास राज़-ए-दोआलाँ का निशान था दोस्तो
क्या खबर किस जूसतजू में इस क़दर आवारा था
दिल के जो गांज़ीना-ए-सरर-ए-निहान था दोस्तो
ढूँढने पर भी ना मिलता था मुझे अपना वुजूद
मैं तलाश-ए-दोस्त में यूँ बेनिशान था दोस्तो
मार्कअड-ए-इक़बाल पर हाज़िर थी जब दिल की तड़प
ज़िंदगी का एक परदा दरमियाँ था दोस्तो
क़र्ब ने पैदा किया था खुद ही दूरी का समान
फासला वरना हेल कहाँ था दोस्तो
बेखुदी में जब मेरे होंतों ने चूमा क़ब्र को
मेरे सीना से गाड़ा-ए-फुरसियान था दोस्तो
रु-बा-रु-ए-जलवा-ए-मार्कअड वुजूद-ए-कम आयर
ज़र-ए-नाक़िस शर्मसार-ए-इंतेहाँ था दोस्तो
पर्ताव-ए-दिल में निहान थी तह-बतेह ये खामोशी
इश्क़ का वो भी इक इज़हार-ए-बयान था दोस्तो
जलवागह-ए-दोस्त का आलम कहूँ मैं तुम से क्या
जलवा ही जलवा वहाँ था मैं कहाँ था दोस्तो
सजडागाह-ए-खुर्शियाँ था यान ना जाने क्या था वो
जो मेरी नज़रों के आयेज आस्तान था दोस्तो
दिल ने हर लम्हे को देखा इक निराले रंग में
लम्हा लम्हा दास्तान दर दास्तान था दोस्तो
जिस के शेर-ओ-नागमगी पर उसत-ए-आलम थी तंग
हर सुबह को वो दोपहरे बेकरण था दोस्तो
सो रहा था खाक के नीचे जहाँ-ए-ज़िंदगी
राज़-ए-हस्ती मेरी नज़रों पर अयान था दोस्तो
काश तुम भी मेरी पलकों का नज़ारा देखते ये 
 नज़ारा कहकशां दर कॅह्कशान था दोस्तो

Dosti Shayari-6

फूल बनकर मुसकराना ज़िंदगी है.,
मुस्करा के गुम भूलना ज़िंदगी है.,
मिलकर लोग खुश होते है तो क्या हुआ..,
बिना मिले दोस्ती निभाना भी ज़िंदगी है.
दिल की हस्ती मिट गयी होती,
और सारे दर्द बढ़ गये होते,
जिंदगी आप जैसे दोस्तो की अमानत है,
वरना हम तो कब के बिखर गये होते..

Dosti Shayari-7

आओ अब कोई दोस्त ऐसा बनाया जाए
जिसे पलकों पे सजाया जाए
रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ इस तरहा के ,की
वो रहे भूखा तो हुंसे भी कुछ खाया ना जाए.

दोस्ती के भी अपने अंदाज़ होते है,
जागती आँखो मे ख्वाब होते है,
सोई आँखो मे सैलाब होते है,
क्यो की दोस्ती क रिश्ते तो नायाब होते है
कहो उसी से जो ना कहे किसी से!
माँगो उसी से जो देदे खुशी से !
चाहो उसे जो तुम्हे मिले किस्मत से !
दोस्ती करो उसी से जो हमेशा निभाए हसी से.

Dosti Shayari-8

सफ़र के हद है वहाँ तक के कुछ निशान रहे
चले चलो के जहाँ तक ये आसमान रहे
ये क्या उठाए क़दम और आ गई मंज़िल
मज़ा तो जब है के पैरों में कुछ थकान रहे
वो शख्स मुझ को कोई जालसाज़ लगता है
तुम उस को दोस्त समझते हो फिर भी ध्यान रहे
मुझे ज़मीन के गहरईओं ने डब लिया
मैं चाहता था मेरे सर पे आसमान रहे
अब अपने बीच मारसीं नही अदावत है
मगर ये बात हमारे ही दरमियाँ रहे
मगर सितारों के फसलें उगा सका ना कोई
मेरी ज़मीन पे कितने ही आसमान रहे
वो एक सवाल है फिर उस का सामना होगा
दुआ करो के सलामत मेरी ज़बान रहे

Dosti Shayari-9

अगर आप एक Tedy Bear होते
तो पास आपने रख लेती
डाल की आपनी झोली में
संग आपने ले चलती
सुबहो शाम देती एक प्यारा सा किस
काहेती मिस्टर हूँ मैं तेरी मिस
हग कर के रोज़ रात को
संग आपने सुलाती
काश आप बार्बी डॉल होते
तो आपने शो केस में रख लेती
देखा के आपने दोस्तों को
खूब बॉस्ट किया करती
जब खेलती सखिया घर घर
तो आपना दूल्हा बना लेती
हलवा पूरी बना के रोज़
आपने दूल्हे राजा को देती
अगर आप मेरे Doggi होते
तो चैन से बनाध के रखती
कान पकड़के कीचती
और खूब प्यार करती
अगर आप होते मेरे पीसी
तो दिन रात आप को देखती
चाहे मामा कितना दट्ती
आप से ही बाते करती रहेती
पर आप हो एक हक़ीक़त हो
आप को दिल हूँ दे बती
पा नही सकती तो क्या
यह दोस्ताना नही टूटने दूँगी

Dosti Shayari-10

काश हमारी दोस्ती अची थी,
काश इसे रिश्ते का नाम ना दिया होता,
सहारे के लिए मिले दामन को देख,
काश तुमहरा हाथ थम ना लिया होता,
आँखो से बहते अपने दर्द तो छिपाने केलिए,
काश तुमाहरी बाहोमे समा ना गये होते,
तुमहरे चुने भर से ही.. है..
काश हम शर्मा ना गये होते,
सागर के लहरो को देख तुमहरे साथ सपने संजोए ना होते,
तुमहरे हाथो की चूवान से
काश यह होत थरथराए ना होते,
अंजाम जानते हुए भी
काश हम उस रह के रही कहलाइए ना होते,
यही सोच सोच कर कुध को कोसते है आज,
की काश यह सब ना हुआ होता,
तब तो सिर्फ़ तन्हाई की बूँद थी, पर.
अब यह तन्हाई का समंदर ना होता.

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Tuesday, 13 October 2015

Dosti Shayari Page-2

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Dosti Shayari-1

मेरे दिल की सारी धड़कने
मारे ख्वाब मेरी चाहतें
मेरे दोस्त तेरे नाम
मैं तुज पे ये जान अपनी
ये बिसरते तुजपे सोप दूं
कोई दुख ना तुज को मिले काबी
मारे रोज़-शुब की इबादते
मेरे दोस्त तेरे नाम
मेरे लब पा हर दूं यही दुआ
के तुजे नसीब हूँ रह्तैन
मेरे अपना आप तो कुछ भी नहीं
मेरी साँसे तेरी अमानते
मेरे दोस्त तेरे नाम

Dosti Shayari-2

तुम्हारे दोस्त कितने है ये मत बत्ताओ
तुम केसे दोस्त हो ये बत्ताओ
तुम्हारे दोस्तो क तो गिनती लखो मे होगी
उनमे से कॉन्सा, ओर क्यू प्यारा ओर केसे है ये बत्ताओ
उस दोस्त से जितना होगा दोस्ती निभाई
तुमने उसका कितना सात निभाया ये बत्ताओ
हर मुस्किल मे हर मुशीबत मे तुम्हारे सात था वो
फिर भी गेरो से तुमने उसकी क्यू क बुरारी ये बत्ताओ
सुबा होते ही तुमसे मिलने आ जाता है घर तुम्हारे
तुम कितनी बार उससे मिलते हो ये बत्ताओ
जब कभी ऑफीस मे या घर पे डांट तुमको पड़ती है
उसने कितना हसाया ओर तुमने गुसे मे क्या खा ये बत्ताओ
तेरे रूठ जाने से वो कितना मनांता, कितने तोफे देता
उसके नाराज़ होने पे तुमने कितना मनाया ये बत्ताओ
वो दोस्त आज नही है करीब तुम्हारे तो उदास क्यू हो
तुमने उसे कितना जाने से रोका मुझे ये बत्ताओ
क्या कोई कमी थी उसकी दोस्ती मे या
तुम उसकी दोस्ती की काबिल नही ये बत्ताओ
आज ये शायरी लिख कर, उस दोस्त क याद दिला द आशिक़े ने
ये मेने शाही क्या या गॉल्ट मुझे साफ-3 ये बत्ताओ

Dosti Shayari-3

दोस्ती पहली बारिश की बूँदो में है,
दोस्ती खिलते फूलों की खुश्बू में है,
दोस्ती ढलते सूरज की किरनो में है,
दोस्ती हर नये दिन की उमीद है,
दोस्ती खवाब है,दोस्ती जीत है,
दोस्ती प्यार है,दोस्ती गीत है,
दोस्ती दो जाहानो का संगीत है,
दोस्ती हर खुशी,दोस्ती ज़िंदगी,
दोस्ती टिशनगी,दोस्ती बंदगी है,
दोस्ती संग चलती हवओ में है,
दोस्ती इन बरसती घटाओ में है,
दोस्ती दोस्तो की वाफाओ में है,
हाथ उठा के जो माँगी गयी है दुआ,
दोस्ती का असर उन दुआव में है.

Dosti Shayari-4

ज़िंदगी तुझ से मिल कर ज़माना हुआ
आ तुझे आज हम मैकड़े ले चलें
रात के नाम होंतों के सागर लिखें
अपनी आँखों में कुछ रात-जागे ले चलें
क्या हॅसिन लोग हैं
आँख आहों के हैं और लब पंखाड़ी
इन के आरैश-ए-खाल-ओ-खत के लिए
अपनी आँखों के हम आईने ले चलें
अजनबी चेहरे में दोस्त बनाते नही
रिश्ते-नाटों के चाँदी बरसती नही
करबाते सोहबातें जिन के याद आएँगी
ऐसे कुछ दोस्तों के पाते ले चलें
उन के आँखों ने जलते सुलगते हुए
मंज़रों के सिवा कुछ भी देखा नही
चेहरा-ए-अफ़सोस के सकिनों के लिए
फूल-ओ-खुश्बू सबा ज़म-ज़में ले चलें
ज़िंदगी तुझ से मिल कर ज़माना हुआ

Dosti Shayari-5

दोस्ती,साहिल है ,मज़ेदार मैं डूबे हुओं के लिए,
दोस्ती,बाहर है,पातज़्द की मार खाए हुओं के लिए,
दोस्ती,एक खुशी है, हर गम भूलने के लिए,
दोस्ती,चिराग है,आन्धेरोन मैं घिरे हुओं के लिए,
दोस्ती,रहगुजर है,तूफ़ानो से जूज्ते हुओं के लिए,
दोस्ती,खवाब है,हालत से मार खाए हुओं के लिए,
दोस्ती को कफ़न किसी का कफ़न ना बनने बीजीए,क्यूंकि
दोस्ती,’जिंदगी’ है मौत से पहले मरने वालों के
लिए.

Dosti Shayari-6

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गये हैं
ज़िंदा तो हैं जीने के अदा भूल गये हैं
खुश्बू जो लूटते हैं मसलते हैं उसी को
एहसास का बदला ये मिलता है काली को
एहसास तो लेते हैं सिला भूल गये हैं
करते हैं मुहब्बत का और एहसास का सौदा
मतलब के लिए करते हैं ईमान का सौदा
दर मौत का और ख़ौफ़-ए-खुदा भूल गये हैं
अब मों में ढालकर कोई पठार नही होता
अब कोई भी क़ुरबान किसी पर नही होता
क्यू भटके हैं मंज़िल का पता भूल गये हैं

Dosti Shayari-7

अर्ज़ कीया है
दूर रह कर दूरियो को बदाया नही करते,
अपने दीवानों को इस तराहा तडपाया नही करते.
हर वक़्त जिसको हो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा हे ख़याल
उसको अपने मैल के लेया तडपाया नही करते..
अब कुछ और भी है
हम आपनो से कफा हो ना सके,
दोस्ती के रिश्ते मे बेवफा हो ना सके
आप भले हूमे भुला के सू जाओ
हम आप को याद कीया बिना सू ना सके.
और क्या बोलू,
एक बात और
दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते है
तूफ़ानो मे साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते है.
यू तो मिल जाते है हाज़ारो गाल गुलाबी,
पेर गालो पे तिल बड़ी मुश्किल से मिलते है.
दोस्तो मैने आपने दोस्त को कभी देखा नही है, but it is only my imagenation.
जाते जाते,
तुम्हे गैरों से कब फ़ुर्सत,
हम अपने गुम से कब खाली.
चलो बस हो चुका मिलना,
ना तुम खाली ना हम खाली.
इसको मेरे दोस्त ने मुज़से कहा था के मैं इसको ग्रूप मे भेज दू, सो मैने उसके
बात मान ले.
सो प्ल्स दुआ करो, के उसका एक मैल आ जाए इसको पड़ने के बाद.

Dosti Shayari-8

तेरी बाज़म-ए-तरब में सोज़-ए-पिन्हं लेके आया हूँ
चमन में याद-ए-अय्याम-ए-बहाराँ लेके आया हूँ
तेरी महफ़िल से जो अरमान-ओ-हसरत लेके निकाला था
वो हसरत लेके आया हूँ वो अरमान लेके आया हूँ
तुम्हारे वास्ते ए दोस्तो मैं और क्या लता
वतन के सुबह और शाम-ए-ग़रीबन लेके आया हूँ
मैं अपने घर में आया हूँ मगर अंदाज़ तो देखो
के अपने आप को मानिंद-ए-महमान लेके आया हूँ

Dosti Shayari-9

फिर भी है तुमको मसीहाई का दावा देखो
मुझको देखो, मेरे मरने के तमन्ना देखो
जुर्म-ए-नज़्ज़ारा पे कों इतनी खुशमाद करता
अब वो रूठे हैं लो और तमाशा देखो
दो ही दिन में वो बात है ना वो चाह ना प्यार
हम ने पहले ही ये तुम से ना कहा था देखो
हम ना कहते थे बनावट से है सारा गुस्सा
हंस के लो फिर वो उन्हों ने हमें देखा देखो
मस्ती-ए-हुस्न से अपनी भी नही तुम को खबर
क्या सुनो अर्ज़ मेरी, हाल मेरा क्या देखो
घर से हर वाक़्य निकल आते हो खोले हुए बाल
शाम देखो ना मेरी जान सवेरा देखो
खाना-ए-जान में नमुदर है एक पैकर-ए-नूर
हसरतो आओ रुख़-ए-यार का जलवा देखो
सामने सब के मुनासिन नही हम पर ये इतब
सर से ढाल जाए ना गुस्से में दुपट्टा देखो
मार मिटे हम तो कभी याद भी तुम ने ना किया
अब मुहब्बत का ना करना कभी दावा देखो
दोस्तो तर्क-ए-मुहब्बत के नसीहत है फज़ूल
और ना मानो तो दिल-ए-ज़र को समझा देखो
सर कहीं बाल कहीं हाथ कहीं पनो कहीं
उस का सोना भी है किस शान का सोना देखो
अब वो शोखी से ये कहते हैं सीतमगार जो हैं हम
दिल किसी और से कुछ रोज़ बहला देखो
हवस-ए-डिड मिटी है ना मितेगी “हसरत”
देखने के लिए चाहो उन्हें जितना देखो

Dosti Shayari-10

कभी सोचती हूँ तुमारे बिना ये ज़िंदगी अधूरी है
कभी सोचती हूँ तुमारे बिना ये ज़िंदगी फ़िज़ुउल है
पर दिल से कहते है के ये प्यार तुमारे बिना एक खाली किताब है
दुनिया के रागिन फूल तुमारे खुशियों के बिना फ़िज़ुउल है
और कुच्छ ना कहे पावू में आज के इस महफ़िल के फूल है
जो दिल-ओ-दिमाग़ से लगी हुए एक ताबीज़ मेरे दिल-ओ-जान है
इस खुशी को समेत कर आपने दिल में छुपाए चल रहे है
एक मुस्कान तुमारे दिल में सदियों से लिखते चल रहे है

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Tuesday, 22 September 2015

Dosti Shayari Page-1

Dosti Shayari Page-1

Shayari-1

किनरो पे सागर के ख़ज़ाने नही आते,
फिर जीवन में दोस्त पुराने नही आते,
जी लो इन पॅलो को हस्स के जनाब,
फिर लौट के दोस्ती के ज़माने नही आते,

Shayari-2

आए दोस्त मैं तुझे भूल जाो, ये तेरी भूल है,
तेरी क्या तारीफ़ करू तू एक महकता हुआ फूल है.

Shayari-3

बिना कहे जो सब कुछ कह जाते है, 
बिना कसूर जो सब कुछ से जाते है, 
डोर रह कर भी जो अपना फ़र्ज़ निभाते है, 
वही इंसान सचे “दोस्त” कहलाते है.. 

Shayari-4

दोस्ती अच्छी हो तो रंग लाती है,
दोस्ती गहरी हो तो सबको भाटी है,
दोस्ती नादान हो तो टूट जाती है,
पर अगर दोस्ती अपने जैसी हो तो इतिहास बनाती है !

Shayari-5

दोस्ती नज़रों से हो तो उससे कुदरत काहेते हैं
सितारों से हो तो जन्नत काहेते हैं
आँखों से हो तो मोहब्बत काहेते हैं
और दोस्ती आप से हो तो किस्मत काहेते हैं

Shayari-6

दिनसे रात होने को आआी है
पता नहीं ये कैसी जुदाई है
परवाह नहीं करते वो अपने दोस्त की
ना जाने ये कैसी दोस्ती निभाई है

Shayari-7

दुनिया में कोई किसी के लिए कुछ नही करता
मरने वेल के साथ हर कोई नही मरता
अरे मरने की बात तो डोर रही
यहाँ तो ज़िंदगी है फिर भी कोई याद नही करता

Shayari-8

दिल की कश्ती बिखर गयी होती,
और रूह के ज़ख़्म भर गये होते.
ज़िंदगी आप जैसे दोस्तो की अमानत है
वरना हम तो कबके मार गये होते

Shayari-9

नज़र अंदाज़ कैसे करे आपको,
नज़रों मे बिताया है जो आपको,
याद आने पर रोए भी तो कैसे,
डरते है झुकी जो पलके तो चुभेंगी आपको.

Shayari-10

यह दोस्ती मेरी नही हमारी है,
इसलिए तो साब रिश्तों सी प्यारी है.
ज़रूरी नही दोस्तों का रोज़ मिलना,
तभी तो स्मस,फोन कॉल्स,मेल्स का सिलसिला जारी है!

Shayari-12

फूल की शुरुवतकलिसे होती है,
ज़िंदगी की शुरुआत जान से होती है,
प्यार की शुरुवात दोस्ती से …
और दोस्ती की शुरुवात आपसे होती है !!

Shayari-13

दूरी हो तो अहसास होता है,
दोस्त के बिना जीवन कितना उदास होता है
उमर हो आपकी सितारों जितनी लंबी,
ऐसा दोस्त कहाँ किसी के पास होता है

Shayari-14

आँखें आपकी हो, पर आँसू मेरे,
ज़िंदगी आपकी हो, पर साँसे मेरी,
दिल आपका हो, पर धड़कन मेरी,
ज़िंदगी के आखरी मोड पर दुआ होगी यही,

Shayari-15

कफ़न आपका हो, और मौत मेरी……
तुम दोस्त हो मेरे सदा क लिए,
मैं ज़िंदा हूँ तुम्हारी वफ़ा क लिए,
कर लेना लाखों शिकवा मुझसे मगर,ना होना खफा खुदा क लिए.

Shayari-16

दोस्ती की बेजोड़ मिसाल हो तुम
ना है कोई कमी लज़बब हो तुम.
नही कोई ऐसा मेरी “दोस्त” जैसा
दोस्तों में' दोस्ती की एक अलग पहचान हो तुम

Shayari-17

तुम से बात हो मेरी तो सुकून मिलता है
जब जाती हो आरिफ़ को कर जाती बेजान हो तुम.
नही करता मॅन तुमसे डोर होने का एक पल
मज़बूरियों से घिरी बहुत परेशान हो तुम

Shayari-18

दोस्ती से कीमती कोई जागीर नही होती

दोस्ती से खूबसूरत कोई तसबीर नही होती

दोस्ती यू तो कचा धागा है

मगर इश्स धागे से मजबूत कोई जंजीर नही होती

Shayari-19

आए यार सुन यारी तेरी मुझे ज़िंदगी से भी प्यारी है

जवाब ही नही हमारा कही बड़ी खूब जोड़ी हमारी है

Shayari-20

मुस्कुराना ही खुशी नही होती,
उमर बिताना ही ज़िंदगी नही होती,
खुद से भी ज़्यादा ख़याल रखना पड़ता है दोस्तो का,
क्योकि दोस्त कहना ही दोस्ती नही होती.

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