Saturday, 31 October 2015

Zindagi Shayari in Hindi Page-12

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Zindagi Shayari-1

इंतिज़ार इतना भी ना कारवओ क डुआइन मौत की माँगों खुदा से

अब तो मिलने चले आओ किसी की ज़िंदगी का सवाल है

Zindagi Shayari-2

उन्होने तो कह दिया तेरा मेरा कोई वास्ता नही है

पर उनकी यादों का क्या वास्ता है जो वो हर वक़्त मेरे पास रहती है

Zindagi Shayari-3

हर सिगनल तेरी याद दिलाता है

तूने भी रंग कुच्छ इसी तरह बदला था

Zindagi Shayari-4

एक दिन हम भी कफ़न ओढ़ जाएँगे

हर एक रिश्ता इस ज़मीन से तोड़ जाएँगे

जितना जी चाहे सतालो यारो एक दिन रुलाते हुए सबको छोड़ जाएँगे

Zindagi Shayari-5

लफ़्ज़ों के फसाने ढूँढते हैं हम लोग

लम्हों में ज़माने ढूँढते हैं हम लोग

तू ज़हेर ही दे शराब कह कर साक़ी

जीने के बहाने ढूँढते हैं हम लोग

Zindagi Shayari-6

मानना के तुझे अछू की ज़रूरत है ए खुदा

मगर सार्रे अकचे मुझे डायने की क्या ज़रूरत थी

Zindagi Shayari-7

कुछ तो बात हम मे भी खास होगी

जो तुमने बर्बाद करने के लिए सिर्फ़ हमे चुना

Zindagi Shayari-8

अगर तुम अपनी आँखो से वार करते हो

तो हम अपनी शायरी से दिल्लो पर राज करते है

Zindagi Shayari-9

डरना चाहिए हस्सिन चीज़ो से

जिसमे से एक मौत है

Zindagi Shayari-10

बेशक वो खामोश थी

मगर आँखे उनके दिल का आलम बहुत खूबसूरती से ब्या कर रहे थी

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Zindagi Shayari in Hindi Page-11

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Zindagi Shayari-1

एहना अखियाँ नू उड़ीक तेरी,

किसे होर वॉल न्ही तकड़िया

जे हुंदा रहे दीदार तेरा,

ए सधिया तक न्ही तक्ड़ियान.

Zindagi Shayari-2

ज़िंदगी को क्या जरुरत हा मंज़िलो की

वक़्त हर मंज़िल आसान बना देता हॅ

मरता न्ही क़िस्सी से जुड़ा हो कर कोई

यह वक़्त उसे भी जीना सीखा देता हे

Zindagi Shayari-3

दुनिया में सिर्फ दिल ही है

जो बिना आराम किये काम करता है

इसलिए उसे खुश रखो चाहे वो अपना हो या किसी ओर का

Zindagi Shayari-4

ना रोया कर सारी सारी रात किसी बेवफा की याद में

वो खुश हे अपनी दुनिया में तेरी दुनिया उजार कर

Zindagi Shayari-5

बहुत शौक़ था मुझे भी दिल लगाने का

शौक़ शौक़ में ही ज़िंदगी बर्बाद कर बैठे

Zindagi Shayari-6

मोहब्बत को जो निभाते है उनको मेरा सलाम है

ओर जो बीच रास्ते मे छोड़ जाते है उनको

हमारा ये पैगाम है

वाडा आ वफ़ा करो तो फिर खुद को फ़ना करो

वरना खुदा के लिए किसी की जिंदगी ना तबाह करो

Zindagi Shayari-7

जो कल था उससे भूल कर तो देखो

जो आज है उससे जी कर तो देखो

आने वाला पल खुद ही सॉवॅर जाएगा

बस ज़िंदगी को प्यार से जी कर तो देखो

Zindagi Shayari-8

दुनिया मे कोई किसी के लिए कुछ नही करता

मरने वेल के साथ हर कोई नही मरता

अरे मरने की बात तो दूर रही

यहा तो ज़िंदगी है फिर बी कोई याद नही करता

Zindagi Shayari-9

चलो बिखरने देते है ज़िंदगी को

संभालने की भी तो एक हद्द होती है

Zindagi Shayari-10

दिल के दर्द को दिल तोर्ने वाले क्या जाना

प्यार की रस्मो के यह ज़माने वाले क्या जाने

होती है कितनी तकलीफ़ कबार के नीचे

यह उपर से फूल चराने वाले क्या जाने

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Thursday, 29 October 2015

Zindagi Shayari in Hindi Page-10

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Zindagi Shayari-1

बरा कठिन है रास्ता जो आसकू तो साथ दू
या ज़िंदगी का फासला मिटा साकू तो साथ दू
बारे फ़रैब खाऊ गे बारे सितम उठाऊ गे
या उमेर भूर का साथ है निभा साकू तो साथ दू
जो तुम काहू तो या दिल तो काइया मैं जान भी फिदा करूँ
जो मैं कहूँ बस इक नज़र लूटा साकू तो साथ दू
हज़ार इंत्यहान , हज़ार आज़माईसाइन
हज़ार दुख हज़ार घूम उठा साकू तो साथ दू
या ज़िंदगी यहाँ खुशी घमून क साथ है
रुला शकू तो साथ दू हुनसा साकू तो साथ दू

Zindagi Shayari-2

इश्क़ लमहादूद जब तक रहनुमा होता नही
ज़िंदगी से ज़िंदगी का हक़ अदा होता नही
इस से बाद कर दोस्त कोई दूसरा होता नही
सब जुड़ा हो जाएँ लेकिन घाम जुड़ा होता नही
बेकरण होता नही बे-इंतेहा होता नही
क़तरा जब तक बाद के क़ुलज़ाम आशना होता नही
ज़िंदगी इक हादसा है और ऐसा हादसा
मौत से भी ख़त्म जिस का सिलसिला होता नही
दर्द से मॅम्र होती जा रही है क़यानत
इक दिल-ए-इंसान मगर दर्द आशना होता नही
इस मक़ाम-ए-क़ुर्ब तक अब इश्क़ पहुँचा है जहाँ
दीदा-ओ-दिल का भी अक्सर वास्ता होता नही
अल्लाह अल्लाह ये कमाल-ए-इरतबाट-ए-हुस्न-ओ-इश्क़
फ़ासले हों लाख दिल से दिल जुड़ा होता नही
वक़्त आता है इक ऐसा भी सर-ए-बाज़म-ए-जमाल
सामने होते हैं वो और सामना होता नही
क्या क़यामत है के इस दौर-ए-तरक़्क़ी में “जिगर”
आदमी से आदमी का हक़ अदा होता नही

Zindagi Shayari-3

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
ज़िंदगी शम्मा के सूरत हो ख़ुदाया मेरी
दूर दुनिया का मेरे दम अंधेरा नो जाए
हर जगह मेरे चमकाने से उजाला हो जाए
हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वाटन के ज़ीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन के ज़ीनत
ज़िंदगी हो मेरी परवाने के सूरत या रब
इल्म के शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रब
हो मेरा कम ग़रीबों के हिमायत करना
दर्द-मंदों से ज़ाइफों से मोहब्बत करना
मेरे अल्लाह बुराई से बचना मुझको
नेक जो रह हो उस रह पे चलना मुझको

Zindagi Shayari-4

दिल पेश क्रू या वाफफा पेश करू

समझ में ना आए क्या पेश करू

जो तुझको लुभले वो आडया मुझ में न्ही

क्यू ना तुझको कोई तेरी ही अदा पेश करू

अर कसज़

Zindagi Shayari-5

रूह तो नाकाम हो ही जाती ह इश्क़ मैं

आसान नई होता किसी को अपना बनाना

Zindagi Shayari-6

में काबिल ए नफ़रत हूँ तो चोर्र दे मुझ को

तू मुझ से यून दिखावे की मोहब्बत ना किया कर

Zindagi Shayari-7

क्यू शर्मिंदा करते हो मेरा हॉल पूछ कर

हाल मेरा वही है जो तुमने बना रखा है

Zindagi Shayari-8

एहसान करो तो दुआओ मे मेरी मौत माँगना

अब जी भर गया है जिंदगी से

Zindagi Shayari-9

खाना बना रही थी इस लिए गरम हूँ..

मा ने ऐसा कह के अपना बुखार छुपा
लिया.

Zindagi Shayari-10

ज़िंदगी इतनी तकलीफ़ देती हैं

दिल मे फिर b उमीद बनी रहती है

दिल कहता है की कुछ नही होगा

पर कुछ तो होगा ये उमीद कहती है

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Zindagi Shayari in Hindi Page-9

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Zindagi Shayari-1

किसी को अपना बनाने मे देर लगती है

क्या हुआ वादा निभाने मे देर लगती है

प्यार तो पल भर मे हो जाता है

पर उन्हे भूलने मे सारी उमर भी कम पड़ जाती हैं…

Zindagi Shayari-2

विश्वास बन के लोग ज़िंदगी मे आते है

ख्वाब बन के आँखो मे समा जाते है

पहले यकीन दिलाते है की वो हमारे है

फिर ना जाने क्यू बदल जाते है

Zindagi Shayari-3

ज़माने में ऐसे भी नादान होते है

अपनी कश्ती ले जाते हैं जहाँ तूफान होते हैं

क्यों बासाते हो उनको दिल में

जो दिल की बस्ती में चाँद दिनों के मेहमान होते हैं

Zindagi Shayari-4

रिश्ता बनाना इतना आसान है

जैसे मिट्टी पे मिट्टी से मिट्टी लिखना

और रिश्ता निभाना इतना मुश्किल है

जैसे पानी पे पानी से पानी लिखना

Zindagi Shayari-5

आओ जाँच लेते हैं दर्द के तराज़ो पेर,

किस का घाम कहाँ तक ही,

शिदताईं कहाँ तक हैं,

कुछ अज़ीज़ लोगों से पोछना तो परता ही,

आज कल मोहबत की कीमते कहाँ तक हैं,

एक शाम आ जाओ खुल क हाल-ए-दिल कह लें,

कौन जाने साँसों की मोहलतान कहाँ तक हैं

Zindagi Shayari-6

किस क़दर तेरी फिकर करता हों कभी इतना तो सोच.

वरना मैं तो वो खुदग़र्ज़ हू जिसको अपनी ज़िंदगी से भी प्यार नही.

Zindagi Shayari-7

साँसों के सिलसिले को ना दो ज़िंदगी का नाम

जीने के बावजूद भी मार जाते हैं कुछ लोग

Zindagi Shayari-8

आओ मिलते हैं अब तसल्ली से,

ज़िंदगी दरमियाँ थी पहले.

Zindagi Shayari-9

था में नींद मे ओर
मुझे इतना
सजाया जा रहा था.
बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था..
ना जाने
था वो कॉनसा अजब खेल
मेरे घर
मे..
बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जेया
rha
था..
थापास मेरा हर अपना
उस
वक़्त..
फिर बी में हर किसी के मंन
से
भुलाया जेया रा था..
जो क्बी देखते
बी ना थे मोहब्बत की
निगाहों
से..
उनके दिल से बी प्यार मुझ
पर
लूटाया जा रहा था..
मालूम न्ही क्यू
हैरान था हर कोई मुझे
सोते
हुए
देख कर..
ज़ोर-ज़ोर से रोकर मूज़े
जगाया जेया रहा था..
काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख
कर..

जहा मुझे हमेशा के
लिए
सुलाया जेया रहा था...
.
मोहब्बत की
इंतेहा थी जिन दिलो मे
मेरे
लिए..

उन्ही दिलो से आज मई,एक
पल
मे दूर जा रहा
था.

Zindagi Shayari-10

फूलों की महक ,
कातों की चुभन का अहसास है ज़िंदगी !

मंज़िल को पाने की खुशी ,
मुश्किलों से लड़ने का विश्वास है ज़िंदगी !

सदेव चलते रहने का हॉंसला ,
अपनो का आशीर्वाद है ज़िंदगी !

दर्द सहने की शक्ति ,
मौत को हराने का चमत्कार है ज़िंदगी !

सादगी सा बचपन, इठलता लड़कपन ,
जवानी में दुल्हन का शृंगार है ज़िंदगी !

कभी डोर-कभी पास ,
कभी धूप -कभी छावन् का आभास है ज़िंदगी !

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Zindagi Shayari in Hindi Page-8

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Zindagi Shayari-1

ज़िंदगी हर कदम पर इम्तिहान लेती है
दो पल की खुशिया देकर रुला देती है
फूल खिलती है, उमीदों की रोशनी देती है
दो ही पल में नौमीदी दिखा देती है
डिलकी दड़कन, प्यार के चिराग बुझा देती है
अंधेरोन में कोहरा बीच्छा देती है.
कुद्रट हाट पकड़ मंज़िल तक लाती है
किस्मत दो पल में ज़मीन दिखा देती है
गीला किसे नही यह किस्मेट दागा देती है
ख्वाब सजाती है दिल में, तोध भी देती है
झूक तो जाएँ, तुम्हारी चाहत कहती है.
दो ही पल तुम्हे, हमें दूर भी कर देती है.
सहन करनी होगी जुदाई, कसक देती है
तड़प कर रात गुजर देती है

Zindagi Shayari-2

मिट गया जब मिटाने वाला फिर सलाम आया तो क्या
दिल के बर्बादी के बाद उन का पेयम आया तो क्या
छूट गईं नब्ज़ें उम्मीदें देने वाली हैं जवाब
अब उधर से नामबर लेके पायँ आया तो क्या
आज ही मिटाना था आए दिल हसरत-ए-दीदार में
तू मेरी नाकामियों के बाद कम आया तो क्या
काश अपनी ज़िंदगी में हम ये मंज़र देखते
अब सर-ए-तुरबत कोई महाशर-खीराम आया तो क्या
सांस उखड़ी आस टूटी छा गया जब रंग-ए-यॅज़
नामबर लाया तो क्या खत मेरे नाम आया तो क्या
मिल गया वो खाक में जिस दिल में था अरमान-ए-डिड
अब कोई खुर्शीद-वश बाला-ए-बम आया तो क्या

Zindagi Shayari-3

इक मुअंमा है समझने का ना समझने का
ज़िंदगी कहे को है ख्वाब है दीवाने का
ज़िंदगी भी तो पाशेमान है यहाँ लाके मुझे
ढूँढती है कोई हिला मेरे मार जाने का
हड्डियाँ हैं कई लिपटी हुई ज़ंजीरों में
लिए जाते हैं जनाज़ा तेरे दीवाने का
तुम ने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग
आओ देखो ना तमाशा मेरे गुंख़ने का
अब इसे दर पे लेजा के सुला दे साक़ी
यूँ बहकना नही अछा तेरे दीवाने का
हम ने छानी हैं बहोट दायर-ओ-हराम के गलियाँ
कहीं पाया ना ठिकाना तेरे दीवाने का
हर नफास उम्र-ए-गुज़शता के है मय्यत “फणी”
ज़िंदगी नाम है मूड मूड के जिए जाने का

Zindagi Shayari-4

मुहब्बातों में दिखावे के दोस्ती ना मिला
अगर गले नही मिलता तो हाथ भी ना मिला
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला
तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था
फिर इसके बाद मुझे कोई अजनबी ना मिला
बहुत अजीब है ये क़ुरबतों के दूरी भी
वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी ना मिला
खुदा के इतनी बड़ी क़यानत में मैंने
बस एक शख्स को माँगा मुझे वो ही ना मिला

Zindagi Shayari-5

आज के दौर मई आए दोस्त ये मंज़र क्यूँ है
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ मई पत्थर क्यूँ है
जब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे मई तू रहता है
फिर ज़मीन पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है
अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी
अपनी नज़रों मई हर इंसान सिकंदर क्यूँ है
ज़िंदगी जीने के क़ाबिल ही नही अब “फकीर”
वरना हर आँख मई अश्कों का समंदर क्यूँ है

Zindagi Shayari-6

नवक् अंदाज़ जिधर दीदा-ए-जनन होंगे
नीम-बिस्मिल कई होंगे कई बेजान होंगे
तब-ए-नज़ारा नही आईना क्या देखने दूं
और बन जाएँगे तस्वीर जो हैरान होंगे
तू कहाँ जाएगी कुछ अपना ठिकाना कर ले
हम तो कल ख्वाब-ए-आदम में शब-ए-हिजरन होंगे
फिर बाहर आई वोही दश्त-ए-नवर्दी होगी
फिर वोही पावं वोही खार-ए-मुगेलन होंगे
नसीहा दिल में तू इतना तो समझ अपने के हम
लाख नादान हुए क्या तुझ से भी नादान होंगे
एक हम हैं के हुए ऐसे पाशेमान के बस
एक वो हैं के जिन्हें चाह के अरमान होंगे
मिन्नत-ए-हज़रत-ए-ईसा ना उठाएँगे कभी
ज़िंदगी के लिए शर्मिंदा-ए-एहसान होंगे
उम्र तो सारी कटी इश्क़-ए-बुटान में “मोमिन”
अब आख़िरी वक़्त में क्या खाक मुसलमान होंगे

Zindagi Shayari-7

तोहमतें चाँद अपने ज़िम्मे धार चले
जिस लिए आए थे सो हम कर चले
ज़िंदगी है या कोई तूफान है
हम तो इस जीने के हाथों मार चले
क्या हमें कम इस गुलों से आए सबा
एक दम आए इधर उधर चले
दोस्तो देखा तमाशा यान का सब
तुम रहो खुश हम तो अपने घर चले
आ बस जी मत जला तब जानिए
जब कोई अफ़सुं तेरा उस पर चले
शमा के मानिंद हम इस बाज़म में
चश्म-नाम आए थे दामन-तार चले
ढूंढते हैं आप से उसको परे
शेख साहिब छोड़ घर बाहर चले
हम जहाँ में आए थे तंहावाले
साथ अपने अब उसे लेकर चले
जून शरर आए हस्ती-ए-बेबुड यान
बारे हम भी अपनी बरी भर चले
एक मैं दिल रेश हूँ वैसा ही दोस्त
ज़ख़्म कितनों का सुना है भर चले
हम ना जाने पाए बाहर आप से
वो भी आड़े आ गया जिधर चले
सक़िया यान लग रहा है चल चलाओ
जब तलाक़ बस चल सके सागर चले
“दर्द” कुछ मालूम है ये लोग सब
किस तरफ से आए थे किधर चले

Zindagi Shayari-8

वो दिल ही क्या तेरे मिलने के जो दुआ ना करे
मैं तुझ को भूल के ज़िंदा रहूं खुदा ना करे
रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िंदगी बनाकर
ये और बात मेरी ज़िंदगी वफ़ा ना करे
ये ठीक है नही मरता कोई जुदाई में
खुदा किसी से किसी को मगर जुड़ा ना करे
सुना है उसको मोहब्बत दुआएँ देती है
जो दिल पे चोट तो खाए मगर गीला ना करे
ज़माना देख चुका है परख चुका है उसे
“क़तील” जान से जाए पर इलतजा ना करे

Zindagi Shayari-9

मौजों का अक्स है खत-ए-जाम-ए-शराब में
या खून उछाल रहा है राग-ए-महताब में
वो मौत है की कहते हैं जिसको सुकून सब
वो आईं ज़िंदगी है जो है इज़तरब में
दोज़ख़् भी एक जलवा-ए-फिर्दौस से हुस्न है
जो इस से बेख़बर हैं वोही हैं अज़ाब में
उस दिन भी मेरी रूह थी माहव-ए-निशात-ए-डिड
मूसा उलझ गए थे सवाल-ओ-जवाब में
मैं इज़तरब-ए-शौक़ कहूँ या जमाल-ए-दोस्त
इक बर्क़ है जो कौंध रही है नक़ाब में

Zindagi Shayari-10

कोई कहता है प्यार एक तरह का नशा है

कोई कहता है प्यार एक तरह की सज़ा है

पर मे कहता हू प्यार करो अगर सकचे दिल से

तो प्यार जीने की एक और वजह है

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Zindagi Shayari in Hindi Page-7

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Zindagi Shayari-1

आज जाने के ज़िद ना करो
यूँ ही पहलू में बैठे रहो
हाए! मार जाएगे, हम तो लूट जाएगे
ऐसी बातें किया ना करो
तुम ही सोचो ज़रा क्यूँ ना रोके तुम्हें
जान जाती है जब उठाके जाते हो तुम
तुम को अपनी कसम जान-ए-जान
बात इतनी मेरी मान लो
वक़्त के क़ैद में  ज़िंदगी है मगर
चाँद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद है
इन को खो कर अभी जान-ए-जान
उम्र भर ना तरसते रहो
कितना मासूम-ओ-रंगीन है ये समा
हुस्न और इश्क़ के आज मेराज है
कल की किसको खबर जाने-जान
रोक लो आज के रत को
गेसुओं के शिकन है अभी शबनमी
और पलकों के साए भी मदहोश हैं
हुस्न-ए-मासूम को जाने-जान
बेखुदी में  ना रुसवा करो

Zindagi Shayari-2

ये ज़िंदगी
आज जो तुम्हारे
बदन के छोटी-बड़ी नसों में
मचल रही है
तुम्हारे पैरों से चल रही है
तुम्हारी आवाज़ में गले से निकल रही है
तुम्हारे लफ़्ज़ों में ढाल रही है
ये ज़िंदगी
जाने कितनी सदियों से
यूँ ही शकलें
बदल रही है
बदलती शक्लों
बदलते जिस्मों में
चलता-फिरता ये इक शरारा
जो इस घड़ी
नाम है तुम्हारा
इसी से सारी चहल-पहल है
इसी से रोशन है हर नज़ारा
सितारे तोडो या घर बसाओ
क़लम उठाओ या सर झूकाओ
तुम्हारी आँखों के रोशनी तक
है खेल सारा
ये खेल होगा नही दुबारा
ये खेल होगा नही दुबारा

Zindagi Shayari-3

दायर-ए-दिल की रात में चिराग सा जला गया
मिला नही तो क्या हुआ वो शाक़ल तो दिखा गया
जूडाईों की ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
ये सुबह की सफेदीयन ये दोपहर की ज़ार्दियन
अब आईने में देखता हूँ मैं कहाँ चला गया
पुकारती हैं फुर्सतें कहाँ गई वो सोहबातें
ज़मीन निगल गई उन्हें या आसमान खा गया
वो दोस्ती तो खैर अब नसीब-ए-दुश्मणन हुई
वो छोटी छोटी रंजिशों का लुत्फ़ भी चला गया
ये किस खुशी की रेत पर गमों को नींद आ गई
वो लहर किस तरफ गई ये मैं कहाँ समा गया
गये दिनों की लाश पर पड़े रहोगे कब तलाक़
उठो अमलकशों उठो की आफताब सर पे आ गया

Zindagi Shayari-4

जियेंगे मगर मुस्कुरा ना सकेंगे के अब ज़िंदगी में मुहब्बत नही है
लबों पे तराने अब आ ना सकेंगे के अब ज़िंदगी में मुहब्बत नही है
बहारें चमन में जब आया करेंगी नज़रों के महफ़िल सजाया करेंगी
नज़ारे भी हम को हंसा ना सकेंगी के अब ज़िंदगी में मुहब्बत नही है
जवानी बुलाएगी सावन के रातें ज़माना करेगा मुहब्बत के बातें
मगर हम ये सावन माना ना सकेंगे के अब ज़िंदगी में मुहब्बत नही है

Zindagi Shayari-5

लबों पे नर्म तबस्सुम रचा के धूल जाएँ
खुदा करे मेरे आँसू किसी के कम आएँ
जो िबतादा-ए-सफ़र में दिए बुझा बैठे
वो बदनसीब किसी का सुराग क्या पाएँ
तलाश-ए-हुस्न कहाँ ले चली खुदा जाने
उमंग थी की फ़ाक़ात ज़िंदगी को अपनाएँ
बुला रहे हैं उफ़ाक़ पर जो ज़ार्ड-रु टीले
कहो तो हम भी फसाने के राज़ हो जाएँ
ना कर खुदा के लिए बार-बार ज़िक्र-ए-बहिषट
हम आसमान का मुक़र्रर फरेब क्यों खाएँ
तमाम मैकड़ा सुनसान मागुसर उदास
लबों को खोल कर कुछ सोचती हैं मिनाएँ

Zindagi Shayari-6

ना जाना आज तक क्या शै खुशी है
हमारी ज़िंदगी भी ज़िंदगी है
तेरे घाम से शिकायत-सी रही है
मुझे सच-मूच बड़ी शर्मिंदगी है
मोहब्बत में कभी सोचा है यूँ भी
की तुझ से दोस्ती या दुशमनी है
कोई दम का हूँ मेहमान मूह ना फेरो
अभी आँखों में कुछ कुछ रोशनी है
ज़माना ज़ुल्म मुझ पर कर रहा है
तुम ऐसा कर सको तो बात भी है
झलक मासूमियों में शोखियों के
बहुत रंगीन तेरी सादगी है
इसे सुन लो सबब इस का ना पूछो
मुझे तुम से मोहब्बत हो गई है
सुना है इक नगर है आँसुओं का
उसी का दूसरा नाम आँख भी है
वोही तेरी मोहब्बत के कहानी
जो कुछ भूली हुई कुछ याद भी है
तुम्हारा ज़िक्र आया इत्तेफ़ाक़न
ना बिगाड़ो बात पर बात आ गई है

Zindagi Shayari-7

ये बता दे मुझे ज़िंदगी
प्यार के रह के हमसफ़र
किस तरह बन गये अजनबी
ये बता दे मुझे ज़िंदगी
फूल क्यू सारे मुरझा गये
किस लिए बुझ गई चाँदनी
ये बता दे मुझे ज़िंदगी
कल जो बाहों में थी
और निगाहों में थी
अब वो गर्मी कहाँ खो गई
ना वो अंदाज़ है
ना वो आवाज़ है
अब वो नर्मी कहाँ खो गई
ये बता दे मुझे ज़िंदगी
बेवफा तुम नही
बेवफा हम नही
फिर वो जज़्बात क्यों सो गये
प्यार तुम को भी है
प्यार हम को भी है
फ़ासले फिर ये क्या हो गये
ये बता दे मुझे ज़िंदगी

Zindagi Shayari-8

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पओगि
मेरे हालत के आँधी में बिखर जाओगी
रंज और दर्द के बस्ती का मैं बाशिंदा हूँ
ये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िंदा हूँ
ख्वाब क्यू देखूं वो कल जिसपे मैं शर्मिंदा हूँ
मैं जो शर्मिंदा हुआ तुम भी तो शरमाओगी
क्यू मेरे साथ कोई और परेशन रहे
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे
ज़िंदगी का ये सफ़र तुमको तो आसान रहे
हमसफ़र मुझको बनाओगी तो पछताॉगी
एक मैं क्या अभी आएँगे दीवाने कितने
अभी गूंजेगे मुहब्बत के तराने कितने
ज़िंदगी तुमको सुनाएगी फसाने कितने
क्यू समझती हो मुझे भूल नही पओगि

Zindagi Shayari-9

ज़िंदा हूँ इस तरह की गम-ए-ज़िंदगी नही
जलता हुआ दिया हूँ मगर रोशनी नही
वो मुद्दातें हुईं हैं किसी से जुड़ा हुए
लेकिन ये दिल की आग अभी तक बुझी नही
आने को आ चुका था किनारा भी सामने
खुद उसके पास मेरी ही नय्या गई नही
होतों के पास आए हँसी , क्या मज़ाल है
दिल का मुआमाला है कोई दिल्लगी नही
ये चाँद ये हवा ये फ़िज़ा, सब है मंद मंद
जो तू नही तो इन में कोई दिल-काशी नही

Zindagi Shayari-10

मेरे ख्वाबों के झरोकोन को सजाने वाली
तेरे ख्वाबों में कहीं मेरा गुज़र है की नही
पूछकर अपनी निगाहों से बताडे मुझको
मेरी रातों के मुक़द्दर में सहर है के नही
चार दिन के ये रफ़ाक़ात जो रफ़ाक़ात भी नही
उम्र भर के लिए आज़ार हुई जाती है
ज़िंदगी यूँ तो हमेशा से परेशन-सी थी
अब तो हर सांस गिरनबार हुई जाती है
मेरी उज़दी हुई नींदों के शाबिस्तानों में
तू किसी ख्वाब के पैकर के तरह आई है
कभी अपनी सी कभी गैर नज़र आती है
कभी इकालास के मूरत कभी हरजाई है
प्यार पर बस तो नही हायमेरा लेकिन फिर भी
तू बता दे की तुझे प्यार करूँ या ना करूँ
तूने खुद अपने तबस्सुम से जगाया है जिन्हें
उन तमन्नाओं का इज़हार करूँ या ना करूँ
तू किसी और के दामन के काली है लेकिन
मेरी रातें तेरी खुश्बू से बसी रहती हैं
तू कहीं भी हो तेरे फूल से आरीज़ के क़सम
तेरी पलकें मेरी आँखों पे झुकी रहती हैं
तेरे हाथों के हरारत तेरे साँसों के महक
तैरती रहती है एहसास के पहना में
ढूँढती रहती हैं तखैल के बाँहें तुझ को
सर्द रातों के सुलगती हुई तनहाई में
तेरा अल्ताफ़-ओ-करम एक हक़ीक़त है मगर
ये हक़ीक़त भी हक़ीक़त में फसाना ही ना हो
तेरी मानुस निगाहों का ये मोहतत पायँ
दिल के खून करने का एक और बहाना ही ना हो
कों जाने मेरी इमरोज़ का फर्डा क्या है
क़ुरबाटें बाद के पाशेमान भी हो जाती है
दिल के दामन से लिपटती हुई रंगीन नज़रें
देखते देखते अंजन भी हो जाती है
मेरी दरमंदा जवानी के तमन्नाओं के
मुज़मािल ख्वाब के तबीर बता दे मुझको
तेरे दामन में गुलिस्ताँ भी है, वीरान भी
मेरा हासिल मेरी तक़दीर बता दे मुझको

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Wednesday, 28 October 2015

Zindagi Shayari in Hindi Page-6

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Zindagi Shayari-1

आँखों में बस के दिल में समा कर चले गये
ख्वाबिदा ज़िंदगी थी जगा कर चले गये
चेहरे तक आस्तीन वो लाकर चले गये
क्या राज़ था की जिस को छिपाकर चले गये
राग राग में इस तरह वो समा कर चले गये
जैसे मुझ ही को मुझसे चुराकर चले गये
आए थे दिल के प्यास बुझाने के वास्ते
इक आग सी वो और लगा कर चले गये
लब तर-तारा के रह गये लेकिन वो आए “जिगर”
जाते हुए निगाह मिलकर चले गये

Zindagi Shayari-2

ज़िंदगी ABCD है
A= ऐतबार
B= भरोसा
C= चाहत
D= दोस्ती
E= एनआयत
F= फेसला
G= गुम
H= हम्डम
I= इंतजार
J= जसबत
K= किस्मत
L= लम्हे
M= मोहब्बत
N= नाराज़गी
O= ओर
P= प्यार
Q= क़ुर्बानी
R= रिस्ते
S= समझोता
T= तन्हाई
U= उमीद
V= वीरनिया
W= वादा
X= क्षकुसे
Y= यादें
ओर इन सूब फीलिंग से मिलकर बनती है..
Z= ज़िंदगी

Zindagi Shayari-3

ज़ख़्म जो आप के इनायत है इस निशानी को क्या नाम दे हम
प्यार दीवार बन के रह गया है इस कहानी को क्या नाम दे हम
आप इल्ज़ाम धार गये हम पर एक एहसान कर गये हम पर
आप के ये मेहरबानी है मेहरबानी को क्या नाम दे हम
आप को यूँ ही ज़िंदगी समझा धूप को हम ने चाँदनी समझा
भूल ही भूल जिस के आदत है इक जवानी को नाम क्या दे हम
रात सपना बाहर का देखा दिन हुआ तो गुबार सा देखा
बेवफा वक़्त बेज़ुबान निकाला बेज़ुबानी को नाम क्या दे हम

Zindagi Shayari-4

सागर से लब लगा के बहुत खुश है ज़िंदगी
सहन-ए-चमन में आके बहुत खुश है ज़िंदगी
आ जाओ और भी ज़रा नज़दीक जान-ए-मान
तुम को क़रीब पके बहुत खुश है ज़िंदगी
होता कोई महल भी तो क्या पूछते हो फिर
बे-वजह मुस्कुरा के बहुत खुश है ज़िंदगी
साहिल पे भी तो इतनी शगूफता रविश ना थी
तूफान के बीच आके बहुत खुश है ज़िंदगी
वीरान दिल है और “आदम” ज़िंदगी का रक़स
जंगल में घर बनके बहुत खुश है ज़िंदगी

Zindagi Shayari-5

आँसुओं के जहाँ पयमलि रही
ऐसी बस्ती चरगों से खाली रही
दुश्मनों के तरह उस से लड़ते रहे
अपनी चाहत भी कितनी निराली रही
जब कभी भी तुम्हारा ख़याल आ गया
फिर कई रोज़ तक बेखायाली रही
लब तरसते रहे इक हँसी के लिए
मेरी कश्ती मुसाफिर से खाली रही
चाँद तारे सभी हम-सफ़र थे मगर
ज़िंदगी रात थी रात काली रही
मेरे सिने पे खुश्बू ने सर रख दिया
मेरी बाँहों में पुलों के डाली रही

Zindagi Shayari-6

हर दम दुआएँ देना हर लम्हा आहें भरना
इन का भी कम करना अपना भी कम करना
यान किस को है मययासर ये कम कर गुज़रना
एक बनकपन पे जीना एक बनकपन पे मारना
जो ज़िस्ट को ना समझे जो मौत को ना जाने
जीना उन्हीं का जीना मारना उन्हीं का मारना
हरियाली ज़िंदगी पे सदाक़े हज़ार जाने
मुझको नही गवारा साहिल के मौत मारना
रंगिनियाँ नही तो रनईयाँ भी कैसी
शबनम सी नज़निन को आता नही संवारना
तेरी इनायतों से मुझको भी आ चला है
तेरी हिमायतों में हर-हर क़दम गुज़रना
कुछ आ चली है आहत इस पायणाज़ के सी
तुझ पर खुदा के रहमत आए दिल ज़रा ठहराना
खून-ए-जिगर का हासिल इक शेर तक के सूरत
अपना ही अक्स जिस में अपना ही रंग भरना

Zindagi Shayari-7

माल-ए-सोज़-ए-गम हाए! निहानी देखते जाओ
भड़क उठी है शम्मा-ए-ज़िंदगानी देखते जाओ
चले भी आओ वो है क़ब्र-ए-फणी देखते जाओ
तुम अपने मरने वेल के निशानी देखते जाओ
अभी क्या है किसी दिन खून रुलाएगा ये खामोशी
ज़ुबान-ए-हाल की जद्द-ओ-बयानी देखते जाओ
गरूर-ए-हुस्न का सदक़ा कोई जाता है दुनिया से
किसी के खाक में मिलती जवानी देखते जाओ
उधर मूह फेर कर क्या ज़ीबाह करते हो, इधर देखो!
मेरी गर्दन पे खंजर के रवानी देखते जाओ
बाहर-ए-ज़िंदगी का लुत्फ़ देखा है और देखोगे
किसी का ऐश मार्ग-ए-नगाहनी देखते जाओ
सुने जाते ना थे तुम से मेरे दिन रात के शिकवे
कफ़न सराकाओ मेरी बे-ज़ुबानी देखते जाओ
वो उठा शोर-ए-मातम आखरी दीदार-ए-मय्यत पर
अब उठा चाहते हैं नाश-ए-फणी देखते जाओ

Zindagi Shayari-8

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नही खाते बस्तियाँ जलने में
और जाम टूटेंगे इस शराब-खाने में
मौसमों के आने में मौसमों के जाने में
हर धड़कते पठार को लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है दिल को दिल बनाने में
फाख्ता के मजबूरी ये भी कह नही सकती
कों साँप रखता है उसके आशियाने में
दूसरी कोई लड़की ज़िंदगी में आएगी
कितनी देर लगती है उसको भूल जाने में

Zindagi Shayari-9

कभी मुझ को साथ लेकर, कभी मेरे साथ चल कर
वो बदल गये अचानक मेरी ज़िंदगी बदल कर
हुए जिस पे मेहरबान तुम कोई खुशनसीब होगा
मेरी हसरतें तो निकलीं मेरे आँसुओं में ढाल के
तेरी ज़ुलफ-ओ-रुख़ के क़ुरबान दिल-ए-ज़र ढूंढता है
वोही चांपाई उजाले वोही सुरमई ढुंदलाके
कोई फूल बन गया है कोई चाँद कोई तारा
जो चिराग बुझ गये हैं तेरी अंजुमन में जल के
मेरे दोस्तो खुदरा मेरे साथ तुम भी ढुणडो
वो यहीं कहीं छुपे हैं मेरे घाम का रुख़ बदल के
तेरी बेझिझक हँसी से ना किसी का दिल हो मैला
ये नगर है आईनों का यहाँ सांस ले संभाल के

Zindagi Shayari-10

ज़िंदगी के हर मोर पर
हम ने धोका खा रखा है
लूग समझते हैं
हम ने दुनिया को हंसा रखा है
लायकेन इन को काइया मालूम!!
कह हम ने
अपने घर के ऐक कमरे में
ऐक छूटा सा अपनी हसरातों का
क़ब्रिस्तान बना रखा है
मौत भी करती है हम से बे वफ़ए
और घूमों ने हूमें
सनम खाना बना रखा है
लूगो की नज़रो में हम ने
अपने लबों पर
मजमूआ-ए-आशर सज़ा रखा है
लायकेन इन को काइया मालूम!!!
हम ने घूम और दुखू का
नाम खुशी बना रखा है

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Zindagi Shayari in Hindi Page-4

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Zindagi Shayari-1

तू नही तो ज़िंदगी मैं और क्या रह जाएगा
दूर तक तन्हाइयों का सिलसिला रह जाएगा
कीजिए क्या गुफ्तगू क्या उन से मिल कर सोचिए
दिल-शिकसता ख्वाहिशों का ज़ायक़ा रह जाएगा
दर्द के सारी तहें और सारे गुज़री हादसे
सब धुआँ हो जाएँगे एक वक़ीया रह जाएगा
ये भी होगा वो मुझे दिल से भुला देगा मगर
यूँ भी होगा खुद उसी में एक खाला रह जाएगा
दायर-ए-इनकार के इक़रार के सरगोषियाँ
ये अगर टूटे कभी तो फासला रह जाएगा

Zindagi Shayari-2

हुमारा दिल सवेरे का सुनहेरा जाम हो जाए,
चिरागो की तरह आँखें जले जब शाम हो जाए,
कभी तो आसमान से चाँद उतरे जाम हो जाए,
तुम्हारे नाम की एक खूबसूरत शाम हो जाए,
अजब हालत थे यू सोडा हो गया आख़िर,
मोहब्बत की हवेली जिस तरह नेलाम हो जाए,
समुंदर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दे हुमको,
हवायें तेज़ हो ओर कश्टियो में शाम हो जाए,
मुझे मालूम है इसका ठिकाना फिर कहा होगा,
परिंदा आसमान च्छुने में जब नाकाम हो जाए,
उजाले अपनी यादो के हुमारे साथ रहने दो,
नज़ाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए.

Zindagi Shayari-3

ज़िंदगी तुझ को मानने निकले
हम भी किस दर्जा दीवाने निकले
कुछ तो दुश्मन थे मुखालिफ़-साफ में
कुछ मेरे दोस्त पुराने निकले
नज़रअंदाज़ किया है उस ने
खुद से मिलने के बहाने निकले
बे-बसरत है ये बस्ती यारो
आईना किस को दिखाने निकले
इन अंधेरोन में जियोगे कब तक
कोई तो शमा जलने निकले

Zindagi Shayari-4

तेरे बगैर ये अब ज़िंदगी कहाँ गुज़री
क़दम क़दम पे तेरे साथ का गुमान गुज़री
ये दिन जो धीरे से फिसला तो शाम के मंज़र
तेरे बगैर उदासी के दरमियाँ गुज़री
वो अश्क हूँ की सर-ए-रह गिर गया था कभी
उठा सका ना कोई कितने कारवाँ गुज़री
मैं खुश्क होके बिखरता रहा हूँ पैरों में
बहुत ज़माना हुआ मुझ पे कश्टियाँ गुज़री
तेरे बदन का आलओ हो मेरी साँसों में
कभी वो लम्हा भी इक बार जान-ए-जान गुज़री
ये बात अब भी नही है किसी से कहने के
तमाम सजदे तेरे दर से रायगन गुज़री

Zindagi Shayari-5

सर से चादर बदन से क़बा ले गई
ज़िंदगी हम फ़क़िरों से क्या ले गई
मेरी मुट्ठी में सूखे हुए फूल हैं
खुश्बुओं को उड़कर हवा ले गई
मैं समुंदर के सिने में चट्टान था
रात एक मौज आई बहा ले गई
हम जो काग़ज़ थे अश्कों से भीगे हुए
क्यों चिरगों के लाउ तक हवा ले गई
चाँद ने रात मुझको जगा कर कहा
एक लड़की तुम्हारा पता ले गई
मेरी शोहरत सियासत से महफ़ुस है
ये तवायफ़ भी इस्मत बचा ले गई

Zindagi Shayari-6

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतना क़रीब से
चेहरे तमाम लगाने लगे हैं अजीब से
इस रेंगति हयात का कब तक उठाएँ बार
बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से
हर घाम पर है मजमा-ए-उशशाक़ मुंतज़ीर
मक़ताल की रह मिलती है कू-ए-हबीब से
इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ
जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से
आए रूह-ए-असर जाग कहाँ सो रही है तू
आवाज़ दे रहे हैं पायांबर सलीब से

Zindagi Shayari-7

खूब पहचान लो असरार हूँ मैं
जींस-ए-उलफत का तलबगार हूँ मैं
इश्क़ ही इश्क़ है दुनिया मेरी
फिटना-ए-अक़्ल से बेज़ार हूँ मैं
छेड़ती है जिसे मिज़रब-ए-आलम
साज़-ए-फितरत का वोही तार हूँ मैं
ऑयिब जो हाफ़िज़-ओ-ख़य्याम में था
हाँ कुछ इस का भी गुनहगार हूँ मैं
ज़िंदगी क्या है गुनाह-ए-आदम
ज़िंदगी है तो गुनहगार हूँ मैं
मेरी बातों में मसीहाई है
लोग कहते हैं की बीमार हूँ मैं
एक लपकता हुआ शोला हूँ मैं
एक चलती हुई तलवार हूँ मैं

Zindagi Shayari-8

होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी
बरहम हुई है यूँ भी तबीयत कभी कभी
आए दिल किसे नसीब ये तौफ़ीक़-ए-इज़तिरब
मिलती है ज़िंदगी में ये रहट कभी कभी
तेरे करम से आए आलम-ए-हुस्न-ए-अफ्रिं
दिल बन गया है दोस्त के खिलवट कभी कभी
दिल को कहाँ नसीब ये तौफ़ीक़-ए-इज़तिरब
मिलती है ज़िंदगी में ये रहट कभी कभी
जोश-ए-जुनून में दर्द के तुगायनियों के साथ
अश्कों में ढाल गई तेरी सूरत कभी कभी
तेरे क़रीब रह के भी दिल मुतमैन ना था
गुज़री है मुझ पे भी ये क़यामत कभी कभी
कुछ अपना होश था ना तुम्हारा ख़याल था
यूँ भी गुज़र गई शब-ए-फुरक़त कभी कभी
आए दोस्त हम ने तर्क-ए-मुहब्बत के बावजूद
महसूस के है तेरी ज़रूरत कभी कभी.

Zindagi Shayari-9

रात आई दर्द की चादर लिए हुए
सोए रहे यह बोझ पलकों पर लिए हुए
रास्ते में मुझको बे-घर देख कर
दोस्त आए है हाथ में पत्थर लिए हुए
आज उसके सामने जाएँगे हम
अपने ही हाथों में अपना सिर लिए हुए
मेरी आँख उमेर भर हस्ती रही
एक सुहाने ख्वाब का मंज़र लिए हुए
लोग आपस में गले मिलते रहे
आस्तीनों में च्छूपे हुए खंज़र लिए हुए
गर्दिशें तो एक बहाना थी मगर
ख्वाहिशें फिरती रही दर दर लिए हुए
तेरी राह ताकते रहे पर तू नही आइए
बैठे रहे तेरी महफ़िल में खाली जाम लिए हुए
ढलती दिख रही है ज़िंदगी की घड़ियाँ
कोई आ रहा है हाथों में मौत का पघम लिए हुए

Zindagi Shayari-10

कहीं छत थी दीवार-ओ-दर थे कहीं
मिला मुझको घर का पता देर से
दिया तो बहुत ज़िंदगी ने मुझे
मगर जो दिया वो दिया देर से
हुआ ना कोई कम मामूल से
गुज़री शब-ओ-रोज़ कुछ इस तरह
कभी चाँद चमका ग़लत वक़्त पर
कभी घर में सूरज उगा देर से
कभी रुक गये रह में बेसबब
कभी वक़्त से पहले घिर आई शब
हुए बंद दरवाज़े खुल खुल के सब
जहाँ भी गया मैं गया देर से
ये सब इत्तिफ़ाक़ात का खेल है
यही है जुदाई यही मेल है
मैं मूड मूड के देखा किया दूर तक
बनी वो खामोशी सदा देर से
सज़ा दिन भी रौशन हुई रात भी
भरे जाम लहराई बरसात भी
रहे साथ कुछ ऐसे हालत भी
जो होना था जल्दी हुआ देर से
भटकती रही यूँ ही हर बंदगी
मिली ना कहीं से कोई रोशनी
छुपा था कहीं भीड़ में आदमी
हुआ मुझ में रौशन खुदा देर से

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Monday, 26 October 2015

Zindagi Shayari in Hindi Page-3

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Zindagi Shayari-1

थरतरी सी है आसमानों में
ज़ोर कुछ तो है नटवानों में
कितना खामोश है जहाँ लेकिन
इक सदा आ रही है कानों में
कोई सोचे तो फ़र्क़ कितना है
हुस्न और इश्क़ के फसानों में
मौत के भी उड़े हैं अक्सर होश
ज़िंदगी के शराबखानों में
जिन के तामिर इश्क़ करता है
कों रहता है उन मकानों में
इन्हीं तिनाकों में देख आए बुलबुल
बिजलियाँ भी हैं आशियनों में

Zindagi Shayari-2

कभी आ लब पे मचल गई कभी अश्क आँख से ढाल गये
वो तुम्हारे घाम के चिराग हैं कभी बुझ गये कभी जल गये
मैं ख़याल-ओ-ख्वाब के महफिलें ना बक़द्र-ए-शौक़ सज़ा सका
तुम्हारी इक नज़र के साथ ही मेरे सब इरादे बदल गये
कभी रंग में कभी रूप में कभी छाँव में कभी धूप में
कहीं आफताब-ए-नज़र हैं वो कहीं माहताब में ढाल गये
जो फ़ना हुए गम-ए-इश्क़ में उन्हें ज़िंदगी का ना घाम हुआ
जो ना अपनी आग में जल सके वो पराई आग में जल गये
या उन्हें भी मेरी तरह जुनून तो फिर उन में उँझ में ये फ़र्क़ क्या
मैं गिरफ़्त-ए-गम से ना बच सका वो हुदूद-ए-गम से निकल गये

Zindagi Shayari-3

तोड़ कर उठे हैं जाम-ओ-शीशा-ओ-पैमाना हम
किस से कह दें आज राज़-ए-गर्दिश-ए-मस्ताना हम
बिजलियाँ रूपोश तूफान दम बखुद सहारा खामोश
जा रहे हैं किस तरफ आए लाग्ज़िश-ए-मस्ताना हम
ज़िंदगी इक मुस्तक़िल शरह-ए-तमन्ना थी मगर
उम्र भर तेरी तमन्ना से रहे बेगाना हम
तुझ में भी कुछ होश-माँडना अदाएँ आ गईं
तुझ से भी अब बदगुमान हैं आए दिल-ए-दीवाना हम
खुश्क आँखें दिल शिकसता रूह तन्हा लब खामोश
बस्तियों से देखते हैं सूरत-ए-वीराना हम
हम तक अब आए ना आए दौर-ए-पैमाना “रविश”
मुतमैन बैठे हैं ज़ेर-ए-साया-ए-मैखना हम

Zindagi Shayari-4

हर एक रूह में एक घाम छुपा लगे है मुझे
ये ज़िंदगी तो कोई बाद-दुआ लगे है मुझे
जो आँसू में कभी रात भीग जाती है
बहुत क़रीब वो आवाज़-ए-पा लगे है मुझे
मैं सो भी जौन तो मेरी बंद आँखों में
तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे
मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ
वो खुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे
मैं सोचता था की लौटूँगा अजनबी के तरह
ये मेरा गाओं तो पहचाना सा लगे है मुझे
बिखर गया है कुछ इस तरह आदमी का वजूद
हर एक फर्ड कोई सनेहा लगे है मुझे

Zindagi Shayari-5

बहुत मिला ना मिला ज़िंदगी से गम क्या है
माता-ए-दर्द बहम है तो बेश-ओ-कम क्या है
हम एक उम्र से वाक़िफ़ हैं अब ना समझाओ
के लुत्फ़ क्या है मेरे मेहरबान सितम क्या है
करे ना जाग मई अलाव तो शेर किस मक़सद
करे ना शहर मई जल-तल तो चश्म-ए-नाम क्या है
अजाल के हाथ कोई आ रहा है परवाना
ना जाने आज के फेहरिस्त मई रक़म क्या है
सजाओ बाज़म ग़ज़ल गाओ जाम ताज़ा करो
बहुत सही गम-ए-गेटी शराब कम क्या है
लिहाज़ मई कोई कुछ दूर साथ चलता है
वागरना दहर मई अब खीज़र का भरम क्या है.

Zindagi Shayari-6

मेरी ज़िंदगी ही मुझे अज़ाब लगे,
आँख मे अश्कों का सैलाब लगे.
तेरे हुस्न का सनी दुनिया मे नही कोई,
चेहरा तेरा मुझे खिलता गुलाब लगे.
क्या ज़रूरत है तुम्हे पर्दे की,
तेरे क़ेसू ही सनम तेरा नक़ाब लगे.
क्यों तोड़ें तेरी कसमों को महखाने जाकर,
जब इन आँखों के ाश्क़ ही मुझे शराब लगे.
क्या खबर तेरी इनयतें हैं कितनी मुझपर,
ज़ख़्मो को गिनू तो कुछ हिसाब लगे.
यून तो कई रूप सजे थे राहों मे,
देखा तो हर शख्स मे जनाब लगे

Zindagi Shayari-7

किताबो क पन्ने पलट के सोचते है,
या पलट जाए ज़िंदगी तो क्या बात है,
तामाना जो पूरी हो खाबों मई
हक़ीक़त बन जाए तो क्या बात है,
कुछ लोग मतलब क लिए डुनधते है मुझे,
बिन मतलब क लिए कोई आए तो क्या बात है,
कटाल करके तो सब ले जाएँगे दिल मेरा,
कोई बातो से ले जाए तो क्या बात है
जो श्रीफो की शराफ़त मई बात ना हो
1 शराबी कह जाए तो क्या बात है ,
ज़िंदा र्हेने तक तो खुशी दूँगी सबको,
किसिको मेरी मौत पे खुशी मिल जाए तो क्या बात है

Zindagi Shayari-8

क्या हुआ तेरा हर इक रोज़ मुझे खत लिखना
और खत में दिल-ए-बेताब के हालत लिखना
मेरी खातिर शब-ए-फुरक़त में ना सोना तेरा
मेरी यादों में परेशन सा होना तेरा
और फिर खत में शब-ए-हिजर के बाबत लिखना
क्या हुआ तेरा हर इक रोज़ मुझे खत लिखना
वो सर-ए-शाम ख़यालों में मेरे खो जाना
और फिर खुद ही तेरा शर्मसार हो जाना
वो अकेले में मुझे प्यार भरा खत लिखना
क्या हुआ तेरा हर इक रोज़ मुझे खत लिखना
किस लिए तोड़ दिए तूने सभी अहद-ए-वफ़ा
क्या हुए वेड मुहब्बत के बता कुछ तो बता
किस लिए छोड़ दिया तू ने मुझे खत लिखना
क्या हुआ तेरा हर इक रोज़ मुझे खत लिखना

Zindagi Shayari-9

ज़िंदगी जैसी तमन्ना थी नही कुछ कम है
हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है
घर के तामिर तसवउर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीन कुछ कम है
बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फिर होगी
दिल में उमीद तो काफ़ी है यक़ीन कुछ कम है
अब जिधर देखिए लगता है की इस दुनिया में
कहीं कुछ चीज़ ज़ियादा है कहीं कुछ कम
आज भी है तेरी दूरी ही उदासी का सबब
ये अलग बात की पहली सी नही कुछ कम है

Zindagi Shayari-10

लब पे पाबंदी नही एहसास पे पहरा तो है
फिर भी अहल-ए-दिल को आहवाल-ए-बशर कहना तो है
अपनी गैरत बेच डालें अपना मसालाक़ छोड़ दें
रहनुमाओं में भी कुछ लोगों को ये मंशा तो है
है जिन्हें सब से ज़्यादा दावा-ए-हुब्ब-ए-वतन
आज उन के वजह से हुब्ब-ए-वतन रुसवा तो है
बुझ रहे हैं एक एक कर के अक़ीदों के दिए
इस अंधेरे का भी लेकिन सामना करना तो है
झूठ क्यू बोलें फ़ारोग-ए-मसलाहट के नाम पर
ज़िंदगी प्यारी सही लेकिन हमें मारना तो है

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Zindagi Shayari in Hindi Page-2

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Zindagi Shayari-1

अब के ताजडीद-ए-वफ़ा का नही इम्कन जनन
याद क्या तुझ को दिलाएँ तेरा पैमान जनन
यूँ ही मौसम के अदा देख के याद आया है
किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसान जनन
ज़िंदगी तेरी आता थी सो तेरे नाम के है
हम ने जैसे भी बसर के तेरा एहसान जनन
दिल ये कहता है की शायद हो फसुरड़ा तू भी
दिल के क्या बात करें दिल तो है नादान जनन
अव्वल-अव्वल के मुहब्बत के नशे याद तो कर
बेपीए भी तेरा चेहरा था गुलिस्ताँ जनन
आख़िर आख़िर तो ये आलम है की अब होश नही
राग-ए-मीना सुलग उठी की राग-ए-जान जनन
मुद्ड़ातों से ये आलम ना तव्क़्क़ो ना उमीद
दिल पुकारे ही चला जाता है जनन जनन
हम भी क्या सदा थे हम ने भी समझ रखा था
गम-ए-दौरान से जुड़ा है गम-ए-जनन जनन
अब के कुछ ऐसी सजी महफ़िल-ए-याराँ जनन
सर-बा-ज़नू है कोई सर-बा-गिरेबान जनन
हर कोई अपनी ही आवाज़ से कांप उठता है
हर कोई अपने ही साए से हिरसन जनन
जिस को देखो वोही ज़ंजीर-बा-पा लगता है
शहर का शहर हुआ दाखिल-ए-ज़िंदन जनन
अब तेरा ज़िक्र भी शायद ही ग़ज़ल में आए
और से और हुआ दर्द का उंवान जनन
हम की रूठी हुई रुत को भी माना लेते थे
हम ने देखा ही ना था मौसम-ए-हिजरां जनन
होश आया तो सभी ख्वाब थे रेज़ा-रेज़ा
जैसे उड़ते हुए औराक़-ए-परेशन जनन.

Zindagi Shayari-2

हवा के आवाज़
खुश्क पत्तों के सरसराहट से भर गई
रोष-रोष पर फतदा फूलों ने
लाखों नौहे जगा दिए हैं
सिलेटी शुआएँ
बुलंद पेड़ों पर गुल मचाते
सियाह कोओं के क़ाफिलों से आती हुई हैं
हर एक जानिब खीज़न के क़ासिद लपक रहे हैं
हर एक जानिब खीज़न के आवाज़ गूँजती है
हर एक बस्ती कशाकश-ए-मार्ग-ओ-ज़िंदगी से निढाल होकर
मुसाफिरों को पुकारती है की – आओ
मुझ को खीज़न के बेमहार
तल्ख़ एहसास से बचाओ

Zindagi Shayari-3

जीने को सब जीते हैं
हेर साया ज़ुख़्मी
जंगल के पन्षी
चुप के केडी
Burbat के नगमे
दूर का शोले पेटे हैं
करने का जज़्बे
रोटी के केडी
दूर्या का पानी
भेगी बिल्ली
हूर बिल के सुंख मैं रहते हैं
जो खुश्की की घुतरी को
बारिश सुंजे थे खोले
सूब आबी भागे
दोराय
कुश कूट मेरी
खुश तक ग्रे
जो चुलते गया
खाबून की बस्ती बस्ते हैं
जीने को सूब जीते हैं

Zindagi Shayari-4

ज़िंदगी एक किराये का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा
मौत जब हम को आवाज़ देगी घर से बाहर निकलना पड़ेगा
ढेर मट्टी का हर आदमी है बाद मरने के होना यही है
या ज़मीनों में तुरबत बनेंगे या चिताओं पे जलना पड़ेगा
रात के बाद होगा सवेरा देखना है अगर तुम को दिन सुनेहरा
पावं फूलों पे रखने से पहले तुम को काँटों पे चलना पड़ेगा
ऐतबार उन के वादों का मार कर वरना आए दिल मेरे ज़िंदगी भर
तुझ को भी मोमबत्ती के तरह क़तरा क़तरा पिघलना पड़ेगा
ये जवानी है पल भर का सपना ढूंड ले कोई महबूब अपना
ये जवानी अगर ढाल गई तो उम्र भर हाथ मलना पड़ेगा

Zindagi Shayari-5

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले चीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो काग़ज़ के कश्ती, वो बारिश का पानी
मुहल्ले के सबसे निशानी पुरानी
वो बुढ़िया जिसे बचे कहते थे नानी
वो नानी के बातों में परियों का डेरा
वो चहरे के झुरिर्यों में सदियों का फेरा
भुलाए नही भूल सकता है कोई
वो छोटी सी रातें वो लंबी कहानी
कड़ी धूप में अपने घर से निकलना
वो चिड़िया वो बुल-बुल वो तितली पकड़ना
वो गुड़िया के शादी में लड़ना झगड़ना
वो झूलों से गिरना वो गिर के संभालना
वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफे
वो टूटी हुई चूड़ियों के निशानी
कभी रेत के उँचे तिलों पे जाना
घरोंदे बनाना बनके मिटाना
वो मासूम चाहत के तस्वीर अपनी
वो ख्वाबों खिलौनों के जागीर अपनी
ना दुनिया का घाम था ना रिश्तों के बंधन
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी

Zindagi Shayari-6

वो दिल नवाज़ है नज़र शनस नही
मेरा इलाज मेरे चरागर के पास नही
तड़प रहे हैं ज़बान पर कई सवाल मगर
मेरे लिए कोई शयन-ए-इल्तमस नही
तेरे उजलों में भी दिल कांप कांप उठता है
मेरे मिज़ाज को आसुदगी भी रस नही
कभी कभी जो तेरे क़ुर्ब में गुज़री थे
अब उन दिनों का तसवउर भी मेरे पास नही
गुज़र रहे हैं अजब मरहलों से दीदा-ओ-दिल
सहर के आस तो है ज़िंदगी के आस नही
मुझे ये दर है की तेरी आरज़ू ना मिट जाए
बहुत दिनों से तबीयत मेरी उदास नही

Zindagi Shayari-7

ज़िंदगी तुझ से मिल कर ज़माना हुआ
आ तुझे आज हम मैकड़े ले चलें
रात के नाम होंतों के सागर लिखें
अपनी आँखों में कुछ रत-जागे ले चलें
क्या हस्सीं लोग हैं
आँख आहों के हैं और लब पंखाड़ी
इन के आरैश-ए-खाल-ओ-खत के लिए
अपनी आँखों के हम आईने ले चलें
अजनबी चेहरे में दोस्त बनाते नही
रिश्ते-नाटों के चाँदी बरसती नही
क़ुरबाटें सोहबातें जिन के याद आएँगी
ऐसे कुछ दोस्तों के पाते ले चलें
उन के आँखों ने जलते सुलगते हुए
मंज़रों के सिवा कुछ भी देखा नही
चेहरा-ए-अफ़सोस के सकिनों के लिए
फूल-ओ-खुश्बू सबा ज़म-ज़में ले चलें
ज़िंदगी तुझ से मिल कर ज़माना हुआ

Zindagi Shayari-8

कभी तो आसमान से चाँद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम के इक खूबसूरत शाम हो जाए
हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए
चरगों के तरह आँखें जलें जब शाम हो जाए
अजब हालत थे यूँ दिल का सौदा हो गया आख़िर
मोहबत के हवेली जिस तरह नीलम हो जाए
समंदर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दो हमको
हवाएँ तेज़ हों और कश्टियोन में शाम हो जाए
मैं खुद भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ,
कोई मासूम क्यों मेरे लिए बदनाम हो जाए
मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा
परिंदा आसमान चुने में जब नाक़ाम हो जाए
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
ना जाने किस गली में ज़िंदगी के शाम हो जाए

Zindagi Shayari-9

जहाँ फूलों को खिलाना था वहीं खिलते तो अछा था
तुम्हीं को हम ने चाहा था तुम्हीं मिलते तो अछा था
कोई आकर हमें पूछे तुम्हें कैसे भुलाया है
तुम्हारे खत को अश्कों से शब-ए-गम में जलाया है
हज़ारों ज़ख़्म ऐसे हैं अगर सिलाते तो अछा था
तुम्हें जितना भुलाया है तुम्हारी याद आई है
बाहर-ए-नौ जो आई है वो ही खुश्बू लाई है
तुम्हारे लब मेरी खातिर अगर हिलाते तो अछा था
मिला है लुत्फ़ भी हम को हसीन यादों के झील-मिल में
कटती है ज़िंदगी तुम बिन मगर इतनी सी है दिल में
अगर तुम आते तो अछा था अगर मिलते तो अछा था.

Zindagi Shayari-10

ये माना ज़िंदगी है चार दिन के
बहुत होते हैं यारो चार दिन भी
खुदा को पा गया वाइज़ मगर है
ज़रूरत आदमी को आदमी के
मिला हूँ मुस्कुरा के उस से हर बार
मगर आँखों में भी थी कुछ नामी सी थी
मुहब्बत में कहें क्या हाल दिल का
खुशी ही कम आती है ना घाम ही
भारी महफ़िल में हर एक से बचाकर
तेरी आँखों ने मुझ से बात कर ली
लड़कपन के अदा है जान-लेवा
ग़ज़ब के छोकरी है हाथ-भर के
रक़ीब-ए-गामज़दा अब सब्र कर ले
कभी उस से मेरी भी दोस्ती थी

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